श्रावणी पूर्णिमा 2020: सावन पूर्णिमा के दिन करें ये कार्य, सुख और सौभाग्य का मिलेगा आर्शीवाद, ऐश्वर्य की भी होगी प्राप्ति

Vivek Sharma
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इस बार सोमवार, 3 अगस्त को रक्षाबंधन का पावन पर्व मनाया जाएगा।

रक्षाबंधन का त्योहार

सावन के आखिरी दिन पड़ने वाली पूर्णिमा को श्रावणी पूर्णिमा कहा जाता है। इसी दिन रक्षाबंधन का त्योहार मनाया जाता है। इस दिन भी दान, पुण्य करने का बहुत महत्व होता है। इस बार सोमवार, 3 अगस्त को रक्षाबंधन का पावन पर्व मनाया जाएगा। यह एक हिन्दू व जैन त्योहार है रक्षाबन्धन में राखी या रक्षासूत्र का बहुत अधिक महत्त्व है भाई की कलाई में राखी बांधने के लिए बहनें रक्षाबंधन का बहुत इंतजार करती है वहीं भाई को भी इस दिन का इंतजार रहता है वो भी बहनों से राखी बंधवाने को बेताब रहते हैं रक्षाबंधन का त्योहार सावन माह की पूर्णिमा को मनाया जाता है यह त्योहार भाई बहन के बंधन को और भी ज्यादा मजबूत कर देता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि शिव जी की भी एक बहन थी। साथ ही अन्य देवताओं की बहनें भी थीं। रक्षाबंधन के खास मौके पर हम आपको बताएंगे ऐसी ही बहनों के बारें में जिनको शायद आप नहीं जानते होंगे।

सावनी पूर्णिमा का दिन ब्राह्मणों के लिए बहुत खास होता है, इस दिन जनेऊ बदलने की परंपरा है। ब्राह्मण पुराने जनेऊ को बदलकर नया जनेऊ धारण करते हैं। जो लोग जनेऊ धारण करते हैं वे श्रावणी पूर्णिमा के दिन धर्मावलंबी मन, वचन और कर्म की पवित्रता का संकल्प लेकर जनेऊ बदलते हैं। यदि पूरे वर्ष में कभी भी जनेऊ बदलने की आवश्यकता होती है तो भी इसी दिन पूजा गया जनेऊ ही धारण किया जाता है इस दिन भाई की कलाई पर राखी बांधने के अलावा ब्राहमणों, गुरुओं और परिवार में छोटी लड़कियों द्वारा संबंधियों को भी रक्षासूत्र बांधा जाता है। इस दिन पुत्री अपने पिता को भी रक्षासूत्र बांध सकती है। इस दिन चंद्रमा अपनी पूर्ण कलाओं के साथ होता है। इसलिए चंद्रदोष निवारण के लिए भी यह दिन उत्तम रहता है। मूल्यतः 27 नक्षत्र माने गए हैं यह नक्षत्र दिन तिथि की गति के अनुसार बदलते हैं श्रावणी अमावस्या के दिन चंद्रमा सावन नक्षत्र में होता है। यह दिन कई कार्यों के लिए उत्तम माना जाता है।

रक्षाबंधन का दिन सावन माह का होता है इस कारण इस दिन भगवान शिवजी की पूजा करने का भी विशेष महत्व माना जाता है। सावन की पूर्णिमा के दिन पवित्र स्थानों से लाया गया जल कांवरिये शिवलिंग पर जल चढ़ाते हैं। और कावड़ यात्रा को संपन्न करते हैं। अमरनाथ यात्रा भी इसी दिन संपन्न होती है। गुजरात में इस दिन को पवित्रोपना के रुप में मनाया जाता है इस दिन रुई की बत्तियां पंचगव्य में डुबोकर भगवान शिव को अर्पित की जाती हैं। श्रावण पूर्णिमा को बहुत शुभ माना गया है इस दिन किए गए कार्य शुभ होते हैं। आइये जानते है की इस दिन क्या करना शुभ रहता है

  • सावन पूर्णिमा के दिन किसी पवित्र नदी में स्नान करके गाय को चारा जरूर खिलाना चाहिए।
  • इस दिन गौ-दान को विशेष महत्व माना गया है। अगर आप गौ दान करना चाहते हैं, तो यह दिन शुभ रहता है।
  • सावन पूर्णिमा के दिन चीटियों को बूरा और मछलियों को आटें की गोली बनाकर जरूर खिलाएं।
  • इस दिन श्री हरि विष्णु और मां लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए उनकी पूजा की जाती है। इस दिन मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु को रक्षासूत्र बांधना चाहिए।
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