उसकी उदास आँखें देख।..दिल चाहा पूछ लूँ उदासी का सबब..

Vivek Sharma

उसकी उदास आँखें देख।दिल चाहा पूछ लूँ उदासी का सबब..पर कई बार सवाल-जवाब सेबेहतर होता है।आहिस्ते सेगले लगा लेनापीठ कोहौले से सहला देना।अँजुरी में चेहरा भरकरमाथे को चूम लेना।और मैंनेआगे बढ़करलगा लिया था उसे सीने से।

काश हो जाए पूरी हर उम्मीद यहां,नहीं इश्क़ तो फिर इनायत ही सही।

Vivek Sharma

काश हो जाए पूरी हर उम्मीद यहां,नहीं इश्क़ तो फिर इनायत ही सही।मोहब्बत नहीं तो बगावत ही सही,तेरे वास्ते यार अदावत ही सही।बहुत बनाए हैं महलों के मलबे यहां,इस बार तो कोई इमारत ही सही।खत्म हुआ दुश्मनी का रिश्ता ही,अब तो तेरे साथ सख़ावत ही सही।हम भी चलेंगे कोई चाल […]

जब चांदनी रात हो और सितारे भी साथ हो । मन में अगर उठ रहे देढो जज्बात हो

Vivek Sharma

जब चांदनी रात हो और सितारे भी साथ हो । मन में अगर उठ रहे देढो जज्बात हो ।।तो बस कागज़ लेकर उन कहानियों को उतार लेना।। सपने हो तो रंग भरना ।शिकायते हो तो तंज मत करना । रुकावटे हो तो अफसोस ना करना ।।और अगर अफसोस हो तो […]

शून्य जैसा हूँ मैं मुझ से जुड़ कर तुम रहोगे वैसे ही,जैसे अभी हो तुम।

Vivek Sharma

शून्य जैसा हूँ मैंमुझ से जुड़ कर तुम रहोगे वैसे ही,जैसे अभी हो तुम।और होकर मुझसे अलग,कुछ नही बदलने वाला।तुम रहोगे वैसे ही,जैसे अभी हो तुम।जोड़ना घटाना तो चलता रहता हैं,बस मुझसे गुणा ना होना कभी।जो मुझसे गुणा हुए,तुम मुझ से हो जाओगे।तुम भी शून्य बन खो जाओगे।

समुन्द्र की क़तरा-ए-बून्द का भी एहसान नहीं है मुझ पर “राही”

Vivek Sharma

समुन्द्र की क़तरा-ए-बून्द का भी एहसान नहीं है मुझ पर “राही”। जब भी पिया है पत्थरों को तोड़ कर पिया है पानी। विरासत में मिला है सिर्फ सलीका-ए-अदब। बाकी सब हाथों से घड़ा है अपनी ज़मीं और आसमां। तुम कहते हो कि हर जगह अपवाद न बनूं। ये अपवाद ही […]

बादल का बरसना भी ज़रूरी है ,आंसू का ढ़लकना भी ज़रूरी है

Vivek Sharma

बादल का बरसना भी ज़रूरी है ,आंसू का ढ़लकना भी ज़रूरी है ,ज़रूरी है कभी ख़ामोशियां ,तो कभी बातों कालरज़ना भी ज़रूरी है।तू इश्क़ हैं अगर , तोअह़द कर ख़ुद से ,तेरा हर लम्हा ,होना भी जरूरी है। अश्कों को पीना , पिलाना बेहतर ,इन्हें आब ए ज़मज़म,बनाना भी ज़रूरी […]

बारिशें तो पहले भी हुआ करती थीं… भीगता तब भी था …पर आज कुछ अलग क्या है।

Vivek Sharma

बारिशें तो पहले भी हुआ करती थीं…भीगता तब भी था …पर आज कुछ अलग क्या है।रब ने इंसान बनाया ..तो..दिल भी है..पता है कि धड़कता भी है …पर आज कुछ अलग क्या हैं और रात तो रोज़ हुआ करती है.. नींद भी थी..ख्वाब भी थे..पर आज कुछ अलग क्या है।यूं […]

कुछ कुछ उलझनों में ,उलझी हुई सी मैं , प्रश्नों और उत्तरों में, लिपटी हुई सी मैं ।

Vivek Sharma

कुछ कुछ उलझनों में ,उलझी हुई सी मैं ,प्रश्नों और उत्तरों में, लिपटी हुई सी मैं ।ढूंढ रही हूं छोर , कोई तो सिरा मिले ,अंधेरे को चीरता हुआ ,रौशन दिया मिले ,हूं अगर मैं ग़लत , तो भी तुझको कुबूल हूं ,मुझ सा ही ग़लत , कोई मुझकोज़रा मिले […]

*आओ लौट चलें* क्या तुमने कभीे किया है प्रेम को प्रेम ! शायद तुम्हें पता भी न होगा प्रेम क्या है

Vivek Sharma

*आओ लौट चलें*क्या तुमने कभीे किया है प्रेम को प्रेम ! शायद तुम्हें पता भी न होगा प्रेम क्या है,प्रेम एहसास है जहाँ न खोना है न पाना वहाँ तो बस देते जाना है,तुम हो कि तौलते रहते हो तराजू में प्रेम को व्यापारियों की तरह ,कोई तुम्हें या तुम […]

वो हवा थी,मेरे तन को छू करनिकल गई

Vivek Sharma

वो हवा थी,मेरे तन को छू करनिकल गई,उसे क्या मालूममैंने, तो उसकीरूह को छुआ है।बीते सालों मेंबस इतना सा समझ पाया हूँ “राही”,’दुनिया’ जो समझती है ‘”गणित’” वो कभीअपनीसमझ में न आया।मैंने, तो वो सब किया, जोअपने कोसमझ आया…. (एन .पी . सिंह )

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