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बारिशें तो पहले भी हुआ करती थीं…
भीगता तब भी था …पर आज कुछ अलग क्या है।
रब ने इंसान बनाया ..तो..दिल भी है..पता है कि धड़कता भी है …
पर आज कुछ अलग क्या हैं और रात तो रोज़ हुआ करती है..
नींद भी थी..ख्वाब भी थे..पर आज कुछ अलग क्या है।
यूं तो मै रोज़ निकलता हूं घर से…लोग भी वही..
रास्ते भी वही..बस पूछते हैं ये बता हुआ क्या है।![]()
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