यादों की तितली ,रंग बिरंगी,पकड़ी तो बेरंग हो गई । बहुत चाहा जिसे, सम्भाला भी बहुत ,वही चीज़ अक्सर खो गई।

Vivek Sharma

यादों की तितली ,रंग बिरंगी,पकड़ी तो बेरंग हो गई ।बहुत चाहा जिसे, सम्भाला भी बहुत ,वही चीज़ अक्सर खो गई।ख्वाहिशों का धुआं करते रहे , इक तमन्ना कहीं बहुत रो गई ।जगाते रहे रोज़ आरज़ू इक नई,और एक चाहत दिल में सो गई।ज़िन्दगी पहुंच गई थी वहां ,मौत होते होते, […]

ख़ामोशी तू मेरे साथ चल ,डर लगता है अब कहने में , सब कुछ तू कहती रहना ,डर लगता है अब सहने में ,

Vivek Sharma

ख़ामोशी तू मेरे साथ चल ,डर लगता है अब कहने में ,सब कुछ तू कहती रहना ,डर लगता है अब सहने में ,तेरा सहारा , मज़बूत लगे ,महफ़िल कितनी अकेली है , लोगों की गिनती ना करना , बस इक तू ही सहेली है । तूने सुना , तूने देखा […]

ये लोग भी कितने अजीब है ना, यहाँ जब तक इँसान जिँदा रहता हैं तब तक कोई किसी को नहीं पूछता….

Vivek Sharma

ये लोग भी कितने अजीब है ना,यहाँ जब तक इँसान जिँदा रहता हैं तब तक कोई किसी को नहीं पूछता,लेकिन जेसे ही वह यह दुनिया छोडकर जाता हैं ना,पुरा कायनात स्टेटस डालता हैं,#जय हिंद.. फितरत सोच और हालात में फर्क है वरना,इन्सान कैसा भी हो दिल का बुरा नहीं होता। […]

मेरी जगह अगर तुम होतेयकीन करो थक गए होते______

Vivek Sharma

मेरी जगह अगर तुम होतेयकीन करो थक गए होते______ जमीन जल चुकी हैं आसमान बाकी हैं, दरख्तों तुम्हारा इम्तिहान बाकी हैं;बादलों बरस जाओ सुखी जमीनों पर, कहीं मकां गिरवी हैं, कहीं लगान बाकी हैं

मेरा गुरू …. जीवन के इस सफ़र में , जो सीख मुझको दे गया , वो ही गुरू मेरा बना , वो ही गुरू मेरा बना ।

Vivek Sharma

मेरा गुरू …. जीवन के इस सफ़र में , जो सीख मुझको दे गया , वो ही गुरू मेरा बना , वो ही गुरू मेरा बना । फूलों ने मुझको सिखाया , कैसे दुःख में खुश रहें । पानी ने मुझको सिखाया , कैसे अपनी राह चुनें । पेड़ों ने […]

आग होती , तो बुझ जाती , आह होती , तो निकल जाती ,

Vivek Sharma

आग होती , तो बुझ जाती , आह होती , तो निकल जाती , क्या तुम्हें ख़बर है, ये क्या है ? प्यास होती , तो पी लेते , राह होती , तो चल देते ,क्या जानें हम ,कि ये क्या है …. दर्द होता , तो दब जाता , […]

कोई जो पूछे कि जीवन क्या है, मैं नाम तुम्हारा बता देती हूं…

Vivek Sharma

सुनो कान्हा जी कोई जो पूछे कि जीवन क्या है,मैं नाम तुम्हारा बता देती हूं… कोई जो पूछे कि दर्पण क्या है..मैं आँखे तुम्हारी बता देती हूं.. कोई जो पूछे कि सुर क्या होते है,मैं बाते तुम्हारी कह देती हूं.. कोई जो पूछे साथ क्या होता है,मैं हाथ तुम्हारा थाम […]

उफ़ कितना बोझ है , तुम्हारे ऊपर आओ , तनिक बैठो न, रख दो ये गठरी,सिर से उतार कर

Vivek Sharma

उफ़… कितना बोझ है ,तुम्हारे ऊपरआओ , तनिक बैठो न,रख दो ये गठरी,सिर से उतार कर …….कितने अस्त व्यस्त से लगते होमाथे पर गहरी- गहरी रेखाऐं…आंखों में गहरी उदासी ……शरीर में शिथिलता…..तुम कभी थकते तो न थे ,सुख-दुख, लाभ-हानिसे परे थे तुम…. सही कहा मित्र , मैं समय हूं ….और,यही […]

खिली सी रंगत पर , हजारों रंगीन अफ़साने लिखे । बेगैरत सादगी आ कर क्यों , मौसम बिगाड़ देती है ??

Vivek Sharma

खिली सी रंगत पर , हजारों रंगीन अफ़साने लिखे ।बेगैरत सादगी आ कर क्यों , मौसम बिगाड़ देती है ?? खिली हो धूप-छांह में , तमस में चांदनी का जलवा ।खामोशी छेड़ती है राग , नीरव में गजल का मसला ।। अनजान सी रागिनी आकर , तरन्नुम बिगाड़ देती है […]

मेरी जिंदगी में सरहद की कोई शाम आए काश मेरी जिंदगी मेरे वतन के काम आए

Vivek Sharma

मेरी जिंदगी में सरहद की कोई शाम आएकाश मेरी जिंदगी मेरे वतन के काम आएना खौफ है मौत का ना आरजू है जन्नत कीख्वाईश बस इतनी सी है जब भी जिक्र हो शहीदों का तो मेरा भी नाम आए कभी कड़ाके की ठंड में ठिठुर के देखनाकभी तपती धुप में […]

Subscribe US Now