Pitru Paksha 2020 Start Date : 2 सितंबर को पूर्णिमा श्राद्ध से शुरू होंगे पितृपक्ष, जानें श्राद्ध की तिथियां

Vivek Sharma
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पितृ पक्ष 2 सितंबर से : देश में कहां-कहां होता है पिंडदान, जानें
प्रत्येक वर्ष पितृ पक्ष में महाराष्ट्र के नासिक, बिहार के गया, मध्यप्रदेश के उज्जैन और उत्तराखंड के ब्रह्मकपाल में लाखों लोग पिंडदान करने जाते हैं। इस बाए कोरोना के कारण हालात बहुत बदले से हैं। इस बार इन प्रमुख तीर्थों से रौनक गायब है।

श्राद्ध पक्ष प्रारम्भ—-

02 सिंतबर (बुधवार) पूर्णिमा का श्राद्ध प्रातः 10:52 तक !तदुपरांत प्रतिपदा का श्राद्ध !
03 सिंतबर (वीरवार)एकम का श्राद्ध दोपहर 12:27 तक तदुपरांत द्वितीया का श्राद्ध !
04 सिंतबर (शुक्रवार)द्वितीया का श्राद्ध दोपहर 02:24 तक!
05 सिंतबर(शानिवार)तृतीया का श्राद्ध पूरा दिन!
06 सिंतबर (रविवार)चतुर्थी का श्राद्ध पूरा दिन!
07 सिंतबर(सोमवार)पंचमी का श्राद्ध पूरा दिन!
08सिंतबर(मंगलवार) षष्ठी का श्राद्ध पूरा दिन!
09सिंतबर(बुधवार)सप्तमी का श्राद्ध पूरा दिन!
10सिंतबर(वीरवार)अष्टमी का श्राद्ध पूरा दिन!
11सिंतबर(शुक्रवार)नवमी का श्राद्ध पूरा दिन!
12 सिंतबर(शानिवार)दशमी का श्राद्ध पूरा दिन!
13 सिंतबर(रविवार)एकादशी का श्राद्ध पूरा दिन!
14 सिंतबर(सोमवार) द्वादशी का श्राद्ध पूरा दिन!
15 सिंतबर(मंगलवार)त्रयोदशी का श्राद्ध पूरा दिन!
16 सिंतबर(बुधवार) चतुर्दशी का श्राद्ध पूरा दिन!
17 सिंतबर(वीरवार)अमावस सर्वपितृ श्राद्ध पूरा दिन!
नोट—सभी प्रभुप्रेमी इन तिथियों में अपने अपने पितृगणों का श्राद्ध करें!
कोविड-19 के नियमों का पालन करते हुए स्वयं भी सुरक्षित रहें औरों को भी सुरक्षित रखें!


श्राद्ध किसे कहते हैं?
श्राद्ध का अर्थ श्रद्धा पूर्वक अपने पितरों को प्रसन्न करने से है। पितरों के प्रति तर्पण अर्थात जलदान पिंडदान पिंड के रूप में पितरों को समर्पित किया गया भोजन व दान इत्यादि ही श्राद्ध कहा जाता है। देव, ऋषि और पितृ ऋण के निवारण के लिए श्राद्ध कर्म सबसे आसान उपाय है। अपने पूर्वजों का स्मरण करने और उनके मार्ग पर चलने और सुख-शांति की कामना करने को ही श्राद्ध कर्म कहते हैं। ऐसी मान्यता है कि मृत्यु के देवता यमराज श्राद्ध पक्ष में जीव को मुक्त कर देते हैं, ताकि वे स्वजनों के यहां जाकर तर्पण ग्रहण कर सकें।

सबसे बड़ा तीर्थ  
पुरानी मान्यताओ के अनुसार गया में गयासुर नाम के दैत्य को देखने से या छूने से ही लोगों के पाप दूर जाते थे। ये स्थान उसी गयासुर के नाम पर प्रसिद्ध है। गयासुर का शरीर पांच कोस था। उसने इसी जगह पर देवताओं को यज्ञ के लिए अपना शरीर दिया था। यहां मुख्य रूप से फल्गु नदी, विष्णुपद मंदिर, नदी के किनारे अक्षयवट पर पिंडदान किया जाता है।  

पिंडदान की विशेष जगहें
उल्लेखनीय है कि देश में श्राद्ध के लिए हरिद्वार, गंगासागर, जगन्नाथपुरी, कुरुक्षेत्र, चित्रकूट, पुष्कर, बद्रीनाथ सहित 55 स्थानों को महत्वपूर्ण माना गया है।  शास्त्रों में पिंडदान के लिए इनमें तीन जगहों को सबसे विशेष माना गया है. इनमें बद्रीनाथ भी है। बद्रीनाथ के पास ब्रह्मकपाल सिद्ध क्षेत्र में पितृदोष मुक्ति के लिए तर्पण का विधान है। हरिद्वार में नारायणी शिला के पास लोग पूर्वजों का पिंडदान करते हैं. बिहार की राजधानी पटना से 100 किलोमीटर दूर गया में साल में एक बार 17 दिन के लिए मेला लगता है। पितृ-पक्ष मेला। कहा जाता है पितृ पक्ष में फल्गु नदी के तट पर विष्णुपद मंदिर के करीब और अक्षयवट के पास पिंडदान करने से पूर्वजों को मुक्ति मिलती है। 

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