कितना कुछ कहना है….. शब्द असहाय हो जाते हैं….

Vivek Sharma
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कितना कुछ कहना है…..
मुझे तुमसे, इतना कि…… गला रुंध जाता है, और
शब्द असहाय हो जाते हैं….
कोरैं गीली हो जाती हैं… परन्तु
सीमा नहीं लांघ सकती…… दो अर्द्ध चंद्र मिलकर
पूर्ण होते होंगे…..
परन्तु जिस बिन्दु पर
उनका समागम होता है……
क्या वहां एक रेखा नहीं उभरती?
दोनों के बीच…… और वही है
कभी न खत्म होने वाला
इन्तज़ार…… तुम्हारे और
मेरे प्रेम का ।
अधूरा फिर भी पूरा ।

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