देवउठान एकादशी: आज से शुरू हो जाएंगे मांगलिक कार्य, जानिए दिसम्बर से लेकर जुलाई तक के विवाह के शुभ मुहूर्त

Vivek Sharma
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हिंदू धर्म में सबसे शुभ और पुण्यदायी मानी जाने वाले कार्तिक माह का देवउठान एकादशी 25 नवम्बर (बुधवार) को है। इसे हरिप्रबोधिनी और देवोत्थान एकादशी के नाम से भी जाना जाता है।

 हिंदू धर्म में सबसे शुभ और पुण्यदायी मानी जाने वाले कार्तिक माह का देवउठान एकादशी 25 नवम्बर (बुधवार) को है। इसे हरिप्रबोधिनी और देवोत्थान एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। इस एकादशी के साथ ही सभी मांगलिक कार्य शुरू हो जाएंगे। बुधवार को देवोत्थान एकादशी के मौके पर चार महीने से क्षीर सागर में सोये भगवान श्रीहरि विष्णु योगनिद्रा से जगा दिए गए जाएंगे। इस मौके पर शालीग्राम के साथ माता तुलसी का विवाह कराया जाएगा। 

पौराणिक मान्यता के अनुसार आषाढ़ शुक्ल पक्ष एकादशी से कार्तिक शुक्ल पक्ष एकादशी के बीच भगवान श्रीविष्णु क्षीरसागर में शयन करते हैं। इस दौरान भाद्रपद शुक्ल पक्ष एकादशी को करवट बदलते हैं। इसके बाद पुण्य की वृद्धि और धर्म-कर्म में प्रवृति कराने वाले श्रीविष्णु कार्तिक शुक्ल एकादशी को निद्रा से जागते हैं। इसी कारण से सभी शास्त्रों में इस एकादशी का फल अति पुण्यदायक कहा गया है। इस मौके पर एक ओर गंगा घाट पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। वहीं, देव दीपावली मनाई जाती है और एक बार फिर दीपक की रोशनी से मंदिर जगमग किया जाएगा।

22 जगह पर तैनात किए गए मजिस्ट्रेट-

देवउठान एकादशी से लेकर कार्तिक पूर्णिमा तक सिमरिया घाट में गंगा स्नान के लिए बिहार और नेपाल समेत अन्य दूरदराज से लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। जिसके मद्देनजर प्रशासन द्वारा विशेष व्यवस्था की गई है। घाट पर बेरिकेटिंग किया गया है, लोगों को कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करने के लिए भी जागरूक किया जाएगा। डीएम अरविन्द कुमार वर्मा ने बताया कि कार्तिक पूर्णिमा के बाद भी दो एवं तीन दिसम्बर को मुंडन की महत्वपूर्ण तिथि रहने के कारण अधिक भीड़ जुटने की संभावना है। इसके मद्देनजर सिमरिया घाट एवं आसपास यातायात एवं विधि व्यवस्था बनाए रखने के लिए 22 जगहों पर मजिस्ट्रेट के साथ पुलिस पदाधिकारी एवं पुलिस जवानों को तैनात किया गया है।

छह दिसम्बर से गूंजेगी शहनाई-

देवोत्थान एकादशी के साथ ही मांगलिक कार्य शुरू जाएंगे। जिसमें सबसे अधिक इंतजार विवाह मुहूर्त का किया जाता है। ज्योतिष अनुसंधान केन्द्र गढ़पुरा के पंडित आशुतोष झा ने बताया कि विवाह के मुहूर्त में वर के लिए सूर्य और कन्या के लिए बृहस्पति की स्थिति देखी जाती है। इसलिए इन दोनों ग्रहों के राशि परिवर्तन से इस वर्ष विवाह के कम शुभ मुहूर्त बन रहे हैं। ग्रहों की स्थिति सही नहीं रहने केे कारण इस वर्ष पांच माह से बंद पड़ी शहनाई की गूंज छह दिसम्बर से सुनने को मिलेगी।
ये हैं विवाह के शुभ दिन-
दिसम्बर- 6, 7, 10, 11 एवं 14 
फरवरी- 27 एवं 21 
अप्रैल- 16, 23, 25, 26 एवं 30 
मई- 2, 3, 7, 12, 13, 21, 23, 24, 26, 30 एवं 31 
जून- 4, 6, 10, 11, 20, 21, 24, 25, 27 एवं 28 
जुलाई- 1, 4, 7, 14 एवं 15 

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