कितना कुछ कहना है…..मुझे तुमसे, इतना कि…… गला रुंध जाता है, औरशब्द असहाय हो जाते हैं….कोरैं गीली हो जाती हैं… परन्तुसीमा नहीं लांघ सकती…… दो अर्द्ध चंद्र मिलकरपूर्ण होते होंगे…..परन्तु जिस बिन्दु परउनका समागम होता है……क्या वहां एक रेखा नहीं उभरती?दोनों के बीच…… और वही हैकभी न खत्म होने वालाइन्तज़ार…… […]
हिन्दी कविता
आपको ये हक़ है,कि मुजरिम हमें करार दें
आपको ये हक़ है,कि मुजरिमहमें करार दें ,मोहब्बत हमारा जुर्म है, औरआप चाहें न प्यार दें ।आपके इल्ज़ाम से,हम भी कम होना चाहेंगे बरी,आपकी तबियत इनकार हो, औरहम इक़रार दें ।मिलना किसी बहाने, एहसान खुद ये आपका ,हमने कब मांगा ये सब, कि आपहमें उधार दें ।ये खु़मारी क्यों आपको,मेरे […]

