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मेरी जिंदगी में सरहद की कोई शाम आए
काश मेरी जिंदगी मेरे वतन के काम आए
ना खौफ है मौत का ना आरजू है जन्नत की
ख्वाईश बस इतनी सी है जब भी जिक्र हो शहीदों का तो मेरा भी नाम आए
कभी कड़ाके की ठंड में ठिठुर के देखना
कभी तपती धुप में चल के देखना
कैसे होती है हिफाजत अपने देश की
जरा सरहद पर जाकर देखना
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