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क्यों पूछता है “राही”मैं पहले सा नहीं हूँ,
शक्ल तो वही है बस”दिवंगत” हो गया हूँ,
तू ढूँढता है जिसको वोह अब मैं नहीं हूँ,
काया तो है पहले सीपर मैं कहीं नहीं हूँ,
था कभी निगाहों मेंअब भी वहीं डटा हूँ,
तब भी “खटकता” था अब भी खटक रहा हूँ,”रिश्तों” की बारात में
कुछ इस तरह घिरा हूँ,तब भी निभा रहा था अब भी निभा रहा हूँ,
शक्ल तो वही है बस”दिवंगत” हो गया हूँ…
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