यादों की तितली ,रंग बिरंगी,पकड़ी तो बेरंग हो गई ।बहुत चाहा जिसे, सम्भाला भी बहुत ,वही चीज़ अक्सर खो गई।ख्वाहिशों का धुआं करते रहे , इक तमन्ना कहीं बहुत रो गई ।जगाते रहे रोज़ आरज़ू इक नई,और एक चाहत दिल में सो गई।ज़िन्दगी पहुंच गई थी वहां ,मौत होते होते, […]
हिन्दी कविता
ख़ामोशी तू मेरे साथ चल ,डर लगता है अब कहने में , सब कुछ तू कहती रहना ,डर लगता है अब सहने में ,
ख़ामोशी तू मेरे साथ चल ,डर लगता है अब कहने में ,सब कुछ तू कहती रहना ,डर लगता है अब सहने में ,तेरा सहारा , मज़बूत लगे ,महफ़िल कितनी अकेली है , लोगों की गिनती ना करना , बस इक तू ही सहेली है । तूने सुना , तूने देखा […]
ये लोग भी कितने अजीब है ना, यहाँ जब तक इँसान जिँदा रहता हैं तब तक कोई किसी को नहीं पूछता….
ये लोग भी कितने अजीब है ना,यहाँ जब तक इँसान जिँदा रहता हैं तब तक कोई किसी को नहीं पूछता,लेकिन जेसे ही वह यह दुनिया छोडकर जाता हैं ना,पुरा कायनात स्टेटस डालता हैं,#जय हिंद.. फितरत सोच और हालात में फर्क है वरना,इन्सान कैसा भी हो दिल का बुरा नहीं होता। […]
मेरी जगह अगर तुम होतेयकीन करो थक गए होते______
मेरी जगह अगर तुम होतेयकीन करो थक गए होते______ जमीन जल चुकी हैं आसमान बाकी हैं, दरख्तों तुम्हारा इम्तिहान बाकी हैं;बादलों बरस जाओ सुखी जमीनों पर, कहीं मकां गिरवी हैं, कहीं लगान बाकी हैं
मेरा गुरू …. जीवन के इस सफ़र में , जो सीख मुझको दे गया , वो ही गुरू मेरा बना , वो ही गुरू मेरा बना ।
मेरा गुरू …. जीवन के इस सफ़र में , जो सीख मुझको दे गया , वो ही गुरू मेरा बना , वो ही गुरू मेरा बना । फूलों ने मुझको सिखाया , कैसे दुःख में खुश रहें । पानी ने मुझको सिखाया , कैसे अपनी राह चुनें । पेड़ों ने […]
आग होती , तो बुझ जाती , आह होती , तो निकल जाती ,
आग होती , तो बुझ जाती , आह होती , तो निकल जाती , क्या तुम्हें ख़बर है, ये क्या है ? प्यास होती , तो पी लेते , राह होती , तो चल देते ,क्या जानें हम ,कि ये क्या है …. दर्द होता , तो दब जाता , […]
कोई जो पूछे कि जीवन क्या है, मैं नाम तुम्हारा बता देती हूं…
सुनो कान्हा जी कोई जो पूछे कि जीवन क्या है,मैं नाम तुम्हारा बता देती हूं… कोई जो पूछे कि दर्पण क्या है..मैं आँखे तुम्हारी बता देती हूं.. कोई जो पूछे कि सुर क्या होते है,मैं बाते तुम्हारी कह देती हूं.. कोई जो पूछे साथ क्या होता है,मैं हाथ तुम्हारा थाम […]
उफ़ कितना बोझ है , तुम्हारे ऊपर आओ , तनिक बैठो न, रख दो ये गठरी,सिर से उतार कर
उफ़… कितना बोझ है ,तुम्हारे ऊपरआओ , तनिक बैठो न,रख दो ये गठरी,सिर से उतार कर …….कितने अस्त व्यस्त से लगते होमाथे पर गहरी- गहरी रेखाऐं…आंखों में गहरी उदासी ……शरीर में शिथिलता…..तुम कभी थकते तो न थे ,सुख-दुख, लाभ-हानिसे परे थे तुम…. सही कहा मित्र , मैं समय हूं ….और,यही […]
खिली सी रंगत पर , हजारों रंगीन अफ़साने लिखे । बेगैरत सादगी आ कर क्यों , मौसम बिगाड़ देती है ??
खिली सी रंगत पर , हजारों रंगीन अफ़साने लिखे ।बेगैरत सादगी आ कर क्यों , मौसम बिगाड़ देती है ?? खिली हो धूप-छांह में , तमस में चांदनी का जलवा ।खामोशी छेड़ती है राग , नीरव में गजल का मसला ।। अनजान सी रागिनी आकर , तरन्नुम बिगाड़ देती है […]
मेरी जिंदगी में सरहद की कोई शाम आए काश मेरी जिंदगी मेरे वतन के काम आए
मेरी जिंदगी में सरहद की कोई शाम आएकाश मेरी जिंदगी मेरे वतन के काम आएना खौफ है मौत का ना आरजू है जन्नत कीख्वाईश बस इतनी सी है जब भी जिक्र हो शहीदों का तो मेरा भी नाम आए कभी कड़ाके की ठंड में ठिठुर के देखनाकभी तपती धुप में […]

